आज लिखने को तो बहुत कुछ है , लेकिन अलफ़ाज़ नहीं है।
कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन शब्द नहीं है।
जब ज़रूरत पड़ती है शब्दों की तो वो हमसे मुह फेर लेते है।
लेकिन एक बात तो है दोस्तों जब भी ये जबान से होते हुए गुज़रते है।
कसम गंगा मैया की ज़िन्दगी बदल देते है...........
ऐसे ही कई मोके ज़िन्दगी हमें देती है की हम अपनी बातो को शब्दों में पिरो कर पेश करे, पर अक्सर नहीं कर पाते है। जब भी अपनी बात कहने का मैका और दस्तूर होता है, तभी अचानक हमारा शब्दकोष सफ़ेद पन्नो में सिमट कर रह जाता है। शब्दों को सही तरह से समेटना हर किसी के बस की बात नहीं। लेकिन जो शब्दों का हो गया उसे और किसी के साथ की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती। बहुत ही प्यारा सा रिश्ता बांध जाता है इनसे, एक ऐसा रिश्ता जिसमे खोने को कुछ नहीं है। ज़िन्दगी के कई अनुभवों को शब्दों के सहारे किताबो का रूप दे देते है। आज खुद को देखती हूँ तो हसी आती है , एक वक़्त शब्दों से नफरत करने वाली मैं आज इन शब्दों पर अपना दिल हार बैठी। जब भी इन शब्दों के बीच होती हूँ दुनियां जहां से अपने को अलग पाती हूँ। एक अलग ही एहसास है जो बहुत ही ख़ास है जो इन शब्दों ने दिया है ।
आज अपने शब्दों के साथ चल पड़ी हूँ
न मुझे मंजिल की फ़िक्र है, न कही पहुचने की जल्दी |
बस मेरे हर कदम में इनका साथ रहा है और में चल रही हूँ ।
ये शब्द मेरा होसला बने,
कभी हार में जीत का एहसास करवाया, तो कभी जीत की ख़ुशी को महसूस करना सिखाया।
ये शब्द मेरे अकेलेपन का सहारा बने तो कभी किसी अपने को होसला देने में मेरी मदद की
कैसे इन शब्दों के साथ मेरा रिश्ता गहराता गया वक़्त का कुछ पता ही न चला
आज लिखने को तो बहुत कुछ है , लेकिन अलफ़ाज़ नहीं है।
कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन शब्द नहीं है।
शब्दों ने कभी नए रिश्ते परोसे
तो कभी मुझे उनसे तनहा किया
ये शब्द ही तो थे जिन्होंने न जाने कितनो को फनाह किया
ये शब्द ही थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई को मुकाम तक पहुचाया
इन शब्दों ने तो सलमान रुश्दी को देश से दूर करवाया
फिर भी दिल यही कहता है
आज लिखने को तो बहुत कुछ है , लेकिन अलफ़ाज़ नहीं है।
कहने को तो बहुत कुछ है लेकिन शब्द नहीं है।
jab udasi gehrai se ubhar aati hai to alfaz motiyo ke roop me bikharne suru ho jate hai... aap ke moti samet ke rakho kahi bikhar na jaye... ek choti si kitab likho jisme har dil ka gum chupa do..
ReplyDeletewell said dost...its a very intimate relationship with words that only few people share..aur aap ki inn baaton ko sun kar ek sher arz karta hun ki:
ReplyDeletemasjidon mandiron ke iss daaur mein insaaniyat badnaam ho gayi..
aaj kal to udti patangein bhi hindu musalmaan ho gayin..
aur ab to wo daur hai jahan shabd hi mere apne nikle..
kal jo aabaad the basti wo fir veeran ho gayi...